मेडिकल हब बनेगा ग्रेटर नोएडा: 587 करोड़ के निवेश से कैंसर और हृदय रोगों की जीवनरक्षक मशीनें होंगी तैयार

यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी ने शुक्रा फ़ार्मास्यूटिकल्स को 10 एकड़ जमीन आवंटित की है। 587 करोड़ के निवेश से यहाँ कैंसर के सबसे उन्नत इलाज 'BNCT' और रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम का निर्माण होगा।

Partap Singh Nagar
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मेडिकल हब बनेगा ग्रेटर नोएडा: 587 करोड़ के निवेश से कैंसर और हृदय रोगों की जीवनरक्षक मशीनें होंगी तैयार

ग्रेटर नोएडा/भारतीय टॉक न्यूज़: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) द्वारा विकसित किया जा रहा ‘मेडिकल डिवाइसेज पार्क’ अब वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार का केंद्र बनने जा रहा है। मंगलवार को प्राधिकरण ने एक बड़ा कदम उठाते हुए शुक्रा फ़ार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड को 10 एकड़ जमीन का आवंटन पत्र (Allotment Letter) सौंपा। कंपनी यहाँ 587 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश के साथ विश्वस्तरीय जीवनरक्षक चिकित्सा तकनीकों का निर्माण करेगी।

कैंसर के जटिल इलाज (BNCT) में मिलेगी बड़ी मदद

इस फैक्ट्री की सबसे बड़ी विशेषता बीएनसीटी (Boron Neutron Capture Therapy) का उत्पादन होगा। यह तकनीक कैंसर के उन जटिल मरीजों के लिए वरदान मानी जाती है, जिनका इलाज पारंपरिक पद्धतियों से संभव नहीं हो पाता। अभी तक इस तरह की तकनीक के लिए भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब यमुना सिटी में इसका उत्पादन होने से भारत वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर अग्रणी भूमिका निभाएगा।

मेडिकल हब बनेगा ग्रेटर नोएडा: 587 करोड़ के निवेश से कैंसर और हृदय रोगों की जीवनरक्षक मशीनें होंगी तैयार

क्या-क्या बनेगा इस मेडिकल डिवाइसेज पार्क में?

मेडिकल डिवाइसेज पार्क केवल एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि अत्याधुनिक उपकरणों की एक पूरी श्रृंखला का केंद्र होगा:

🔸 रेडियोलॉजी और इमेजिंग: सीटी स्कैनर, एमआरआई (MRI), पीईटी स्कैन और अल्ट्रासोनोग्राफी मशीनों का निर्माण।

🔸हृदय रोग समाधान: हार्ट वाल्व, स्टेंट्स और लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइसेज (LVAD)।

🔸सर्जिकल रोबोटिक्स: सॉफ्ट टिश्यू सर्जिकल रोबोट्स, ऑर्थोपेडिक और न्यूरो-स्पाइन रोबोटिक सिस्टम्स, जो सर्जरी में 100% सटीकता सुनिश्चित करेंगे।

* क्रिटिकल केयर: वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और आईसीयू (ICU) के लिए जरूरी रेस्पिरेटरी केयर सिस्टम।

हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार

जमीन आवंटन के अवसर पर यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह और एसीईओ शैलेंद्र भाटिया मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने से न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति आएगी, बल्कि हजारों स्थानीय युवाओं को उच्च-तकनीकी रोजगार (High-tech Jobs) के अवसर भी मिलेंगे।

यमुना सिटी में लगने वाला यह प्लांट ‘मेक इन इंडिया’ के सपने को सच करेगा। विदेशी मशीनों पर निर्भरता कम होने से न केवल इलाज सस्ता होगा, बल्कि भारत मेडिकल टूरिज्म का भी बड़ा केंद्र बनेगा।

 

 

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