ग्रेटर नोएडा/गौतमबुद्ध नगर भारतीय टॉक न्यूज़: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर (नोएडा) से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कुख्यात गैंगस्टर रवि काना उर्फ रवि नागर को बांदा जेल से संदिग्ध परिस्थितियों में रिहा कर दिया गया है। इस मामले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM), गौतमबुद्धनगर ने बांदा जेल अधीक्षक से एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
क्या है पूरा मामला?
न्यायालय के आदेशानुसार, रवि काना के खिलाफ थाना सेक्टर-63 में दर्ज मुकदमे (मु०अ०सं०-20/2026) के तहत बी-वारंट जारी किया गया था। 29 जनवरी 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए रवि काना की रिमांड पर सुनवाई हुई थी। इसके बावजूद, बांदा जेल प्रशासन ने उसी शाम 6:39 बजे उसे जेल से रिहा कर दिया।

जेल प्रशासन का तर्क
🔸जेल अधीक्षक, बांदा द्वारा कोर्ट को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार:
रवि काना के खिलाफ अन्य सभी मामलों में रिहाई के आदेश प्राप्त हो चुके थे।
🔸वह केवल बी-वारंट के आधार पर 29 जनवरी तक कस्टडी में था।
🔸जेल प्रशासन का कहना है कि शाम 6:30 बजे तक न्यायालय से रिमांड या अगली पेशी के संबंध में कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ, जिसके कारण उसे और अधिक समय तक निरुद्ध रखना संभव नहीं था।
कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जेल प्रशासन की इस जल्दबाजी पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में तीन मुख्य बिंदुओं पर जवाब मांगा है:
1. जब जेल प्रशासन को पता था कि रवि काना के खिलाफ बी-वारंट लंबित है, तो उसे किन परिस्थितियों में रिहा किया गया?
2. जिस वक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रिमांड की प्रक्रिया चल रही थी, उस दौरान बिना कोर्ट को सूचना दिए आरोपी को क्यों छोड़ा गया?
3. जेल प्रशासन की इस लापरवाही के लिए उन पर ‘कस्टडी से भागने में मदद करने’ का मुकदमा क्यों न चलाया जाए?
4. न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल अधीक्षक को 06 फरवरी 2026 तक अपनी स्पष्टीकरण रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इसकी प्रतियां डी.आई.जी. (जेल) और डी.जी. (जेल) को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं।
रवि काना पहले से ही कई गंभीर मामलों में आरोपी है, जिसमें गैंगस्टर एक्ट, सामूहिक दुष्कर्म, जबरन वसूली और विदेश भागने के प्रयास शामिल हैं। वर्ष 2024 में उसे थाईलैंड से गिरफ्तार कर भारत लाया गया था और बाद में नोएडा जेल से बांदा जेल शिफ्ट किया गया था। यह घटना जेल प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रही है।अधिक जानकारी के लिए अदालत के आदेश की प्रति और पुलिस जांच पर नजर रखी जा रही है।
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