दादरी: मोहन स्वरूप अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का गंभीर आरोप

ग्रेटर नोएडा के दादरी क्षेत्र में एक निजी अस्पताल में डिलीवरी के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है, पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

Partap Singh Nagar
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दादरी: मोहन स्वरूप अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का गंभीर आरोप

दादरी (बादलपुर) | भारतीय टॉक न्यूज़ : जनपद के बादलपुर क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ एक निजी अस्पताल में डिलीवरी के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई, जिसके बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए  पुलिस में शिकायत दी है, जिसके बाद पुलिस जांच में जुट गई है।

मिली जानकारी के अनुसार, बादलपुर क्षेत्र के सादुल्लापुर गांव निवासी सुमित नागर अपनी पत्नी आरती का इलाज कराने के लिए 12 मार्च को दादरी स्थित मोहन स्वरूप अस्पताल पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि आरती की गर्भावस्था के दौरान पहले से ही डॉक्टर प्रगति जैन के पास इलाज चल रहा था।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने उन्हें डिलीवरी के लिए भर्ती कर लिया और 12 से 13 मार्च तक दवाइयां दी गईं। आरोप है कि शुक्रवार देर रात करीब 2:15 बजे अस्पताल में मौजूद जूनियर डॉक्टर आयशा को डिलीवरी कराने के लिए कहा गया।

  • सुमित की पत्नी आरती का इलाज शुरुआत से डॉ. प्रगति जैन द्वारा किया जा रहा था।
  • डिलीवरी की संभावित तारीख 5 अप्रैल 2026 थी, लेकिन डॉ. प्रगति जैन के कहने पर मरीज को 12 मार्च 2026 को ही भर्ती कर लिया गया।
  • 12 से 13 मार्च तक मरीज को दर्द की दवाइयां दी गईं।
  • 14 मार्च 2026 को रात करीब 2:15 बजे, डॉ. प्रगति जैन अस्पताल में मौजूद नहीं थीं। उनके कहने पर जूनियर डॉक्टर आयशा ने डिलीवरी का जिम्मा लिया।

परिजनों के साथ बदसलूकी और अस्पताल का पक्ष

परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों की लापरवाही और जल्दबाजी के कारण डिलीवरी के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई। आरोप यह भी लगाया गया कि बिना किसी जानकारी के डॉक्टर मृत शिशु को कपड़े में लपेटकर परिजनों को सौंपकर वहां से चली गईं। घटना के बाद जब परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कुछ लोगों ने परिजनों के साथ अभद्रता और गाली-गलौज भी की तथा उन्हें वहां से धक्का देकर बाहर निकाल दिया।

  1. परिजनों का आरोप है कि डॉ. आयशा ‘नमाज का बहाना’ बनाकर बार-बार मरीज के पास से हट रही थीं और सही से अटेंड नहीं कर रही थीं।
  2. डॉक्टर ने नॉर्मल डिलीवरी के लिए कहा, जबकि परिजन ऑपरेशन के लिए भी तैयार थे।
  3. आरोप है कि डॉक्टरों ने जबरदस्ती बच्चे को बाहर निकाला, जिससे शिशु की मृत्यु हो गई।
  4. डॉक्टर आयशा ने मृत शिशु को तौलिए में लपेटकर परिजनों को दे दिया और बिना कोई जानकारी दिए लेबर रूम का दरवाजा लॉक करके सो गईं।

इस पूरे मामले को लेकर परिजनों ने पुलिस को लिखित शिकायत दी है। पुलिस ने डॉक्टर, अस्पताल स्टाफ और प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

वहीं अस्पताल के निदेशक संजय गोयल का कहना है कि डिलीवरी के दौरान नवजात शिशु मृत पैदा हुआ था। उन्होंने बताया कि महिला डॉक्टर के साथ परिजनों ने अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज की थी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नोट: यह खबर पीड़ित परिजनों द्वारा दी गई जानकारी और शिकायत के आधार पर प्रकाशित की गई है। इस मामले की सत्यता की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही है। भारतीय टॉक न्यूज़ का उद्देश्य केवल जनहित में जानकारी साझा करना है। यदि इस मामले में किसी पक्ष को आपत्ति या स्पष्टीकरण देना हो तो वे अपना पक्ष हम तक भेज सकते हैं, जिसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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