ग्रेटर नोएडा चिटहेरा भूमि घोटाला: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सह-आरोपियों को नहीं मिलेगी स्वतः राहत; ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के चिटहेरा भूमि घोटाले में बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सह-आरोपियों को हाईकोर्ट के आदेश का स्वतः लाभ नहीं मिलेगा। ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द।

Partap Singh Nagar
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ग्रेटर नोएडा चिटहेरा भूमि घोटाला: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सह-आरोपियों को नहीं मिलेगी स्वतः राहत; ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द

नई दिल्ली/नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़ : नोएडा के चर्चित भूमि घोटाले से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट द्वारा किसी एक आरोपी की याचिका पर दी गई राहत का लाभ अन्य सह-आरोपियों को अपने आप नहीं मिल सकता। जस्टिस आह्वानुदीन अमानुल्लाह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें हाईकोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या करते हुए अन्य आरोपियों को भी राहत दे दी गई थी।

क्या है पूरा मामला? (चिटहेरा जमीन घोटाला)

यह मामला दादरी तहसील के चिटहेरा गांव की लगभग 300 बीघा जमीन के कथित अवैध लेनदेन से जुड़ा है। आरोप है कि किसानों पर दबाव बनाकर उनकी कीमती जमीन को कौड़ियों के भाव खरीद लिया गया था। इस संबंध में वर्ष 2022 में गौतम बुद्ध नगर में धोखाधड़ी, जालसाजी, उगाही, आपराधिक साजिश और SC/ST एक्ट की गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील धनंजय जैन ने दलील दी कि यह गरीब किसानों के हक की लड़ाई है जिनकी जमीन हड़पी गई है।

ट्रायल कोर्ट की ‘गलत समझ’ पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

दिसंबर 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आरोपी ‘मालू’ की याचिका पर उसके खिलाफ दर्ज FIR और चार्जशीट को रद्द कर दिया था। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने यह मान लिया कि पूरी कार्यवाही ही खत्म हो गई है और इसका लाभ अन्य आरोपियों को भी दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि:

🔸 हाईकोर्ट का आदेश सिर्फ उस व्यक्ति (मालू) के लिए था जिसने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

🔸 ट्रायल कोर्ट को आदेशों की अनावश्यक व्याख्या करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे न्यायिक प्रक्रिया में देरी होती है।

🔸 मालू को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही फिर से शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

यूपी सरकार से पूछा- किसानों के लिए क्या किया?

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी सवाल दागे हैं। अदालत ने सरकार से जवाब मांगा है कि प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं? साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या उन विवादित बिक्री विलेखों (Sale Deeds) को रद्द करने की कोई प्रक्रिया शुरू की गई है जिनसे किसानों की जमीन ली गई थी।

अदालत ने अन्य सह-आरोपियों की याचिकाओं को तीन महीने के भीतर निपटाने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद चिटहेरा भूमि घोटाले के अन्य आरोपियों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।

 

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