Greater Noida News : नोएडा के ग्राम याकूबपुर में हुई एक शादी ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक नई लड़ाई छेड़ दी है। दिल्ली कोतवाली के SHO जतन चौधरी के सुपुत्र हर्षित चौधरी का विवाह 28 नवंबर को गिरधरपुर निवासी अरुण चंडीला एडवोकेट की सुपुत्री आकांक्षा के साथ बेहद सादगी और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस शादी ने न केवल दोनों परिवारों बल्कि पूरे गुर्जर समाज को एक नई दिशा दी है।

दहेज को कहा अलविदा:
इस विवाह में वर पक्ष ने दहेज और किसी भी प्रकार के सामान को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया। शादी की सभी पारंपरिक रस्में—चिट्ठी, लग्न भात, और कन्यादान—सिर्फ 1 रुपये में निभाई गईं। यहां तक कि भात के तौर पर भी केवल 101 रुपये लिए गए। यह साफ संकेत है कि एक शादी को धूमधाम से मनाने के लिए दहेज लेना जरूरी नहीं है।
समाज ने किया स्वागत:
गुर्जर समाज में जहां दहेज का प्रचलन लंबे समय से चर्चा में रहा है, वहीं प्रधान रविंद्र सिंह याकूबपुरिया और उनके परिवार ने इस सादगीपूर्ण शादी के जरिए समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया है। उनकी इस पहल की पूरे समाज में सराहना हो रही है। समाज के वरिष्ठ सदस्यों और युवाओं ने इस शादी को एक आदर्श मानते हुए इसे दहेज मुक्त विवाह की ओर बढ़ते समाज का संकेत बताया है।
एक नई शुरुआत:
मनोज चौधरी एडवोकेट, याकूबपुरिया ने इस प्रयास के लिए प्रधान रविंद्र सिंह और भाई जगत सिंह याकूबपुरिया को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह शादी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। उन्होंने कहा, “ऐसे प्रयास समाज में बदलाव की शुरुआत हैं। यह शादी समाज को दहेज प्रथा से मुक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।”
सादगी का संदेश:
इस पहल ने साबित कर दिया कि विवाह संस्कार केवल सादगी और सम्मान के साथ भी किया जा सकता है। समाज के लोग अब इस दहेज मुक्त शादी की मिसाल को आगे बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। यह शादी एक संदेश देती है कि एक शादी को धूमधाम से मनाने के लिए दहेज लेना जरूरी नहीं है। बल्कि, प्यार, सम्मान और सादगी से भी एक शादी को यादगार बनाया जा सकता है।
आगे का रास्ता:
यह शादी एक नई शुरुआत है। यह शादी समाज को यह संदेश देती है कि दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा। हमें अपनी बेटियों को बोझ नहीं बल्कि सम्मान देना होगा। हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहां हर लड़की को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार मिले।
नोएडा के ग्राम याकूबपुर में हुई यह शादी दहेज प्रथा के खिलाफ एक बड़ी जीत है। यह शादी हमें उम्मीद देती है कि हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर सकते हैं जहां दहेज का कोई स्थान नहीं होगा।

