ग्रेटर नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़ : ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव के बहुचर्चित निक्की भाटी मौत प्रकरण में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पिछले करीब नौ महीनों से दोनों परिवारों के बीच चल रहा हाई-प्रोफाइल विवाद अब सामाजिक मध्यस्थता के बाद सुलझ गया है। समाज के गणमान्य लोगों और बुजुर्गों की मौजूदगी में हुई कई दौर की महापंचायत के बाद दोनों पक्षों ने बच्चों के भविष्य और पारिवारिक हितों को सर्वोपरि मानते हुए आपसी समझौते पर अंतिम मुहर लगा दी है।
समझौते की बड़ी शर्तें: बहन कंचन की होगी विदाई, बच्चों को मिलेगी संपत्ति
विश्वस्त सूत्रों और पारिवारिक इनपुट से मिली जानकारी के अनुसार, इस समझौते को अमलीजामा पहनाने के लिए पंचायत ने कुछ बेहद महत्वपूर्ण शर्तें तय की हैं, जिन पर दोनों परिवार राजी हो गए हैं:
🔸बहन कंचन लौटेंगी ससुराल: मां की मौत के बाद बेसहारा हुए मासूम बच्चों की सही परवरिश और देखरेख के लिए मृतका निक्की भाटी की बहन कंचन को दोबारा उसी ससुराल में रखने (विदा करने) पर सहमति बनी है।
🔸बच्चों के नाम होगी प्रॉपर्टी: बच्चों के अधिकारों को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए निक्की के हिस्से की पारिवारिक संपत्ति को सीधे बच्चों के नाम हस्तांतरित (Transfer) किया जाएगा।
🔸पारिवारिक फैसला: दोनों परिवारों का कहना है कि यह कड़ा फैसला केवल और केवल मासूम बच्चों के बेहतर कल और उनके मानसिक व सामाजिक भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया है।
इस सामाजिक समझौते के बाद अब कानूनी मोर्चे पर भी सरगर्मी बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि निक्की का पीड़ित परिवार जल्द ही सक्षम अदालत में अपना आधिकारिक शपथ पत्र (एफिडेविट) दाखिल करने जा रहा है। इस हलफनामे के जरिए मामले को कानूनी रूप से वापस लेने और बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, यह पूरा मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण इस पर अंतिम फैसला न्यायालय की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही साफ होगा।
21 अगस्त 2025 को हुई थी निक्की की संदिग्ध मौत
गौरतलब है कि बीते साल 21 अगस्त 2025 को ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में 26 वर्षीय निक्की भाटी की संदिग्ध परिस्थितियों में जलकर मौत हो गई थी। इस घटना के बाद मायके पक्ष ने दहेज उत्पीड़न और हत्या के गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद पूरे वेस्ट यूपी में हड़कंप मच गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नोएडा पुलिस ने ताबड़तोड़ एक्शन लिया था और मुख्य आरोपी पति विपिन भाटी को 23 अगस्त 2025 को एक एनकाउंटर (पुलिस मुठभेड़) के बाद गिरफ्तार किया था। इसके अलावा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतका की सास दयावती, ससुर सत्यवीर और जेठ रोहित भाटी को भी सलाखों के पीछे भेज दिया था।
इस जघन्य और सुर्खियों में रहे मामले में अचानक हुए समझौते ने स्थानीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ इस फैसले को बच्चों के पालन-पोषण और भविष्य के लिहाज से व्यावहारिक बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ गंभीर धाराओं के मामले में इस तरह की सुलह को लेकर सामाजिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं भी बनी हुई हैं। बहरहाल, पंचायत की इस बड़ी पहल से नौ महीने से चला आ रहा हिंसक तनाव अब शांत होता दिखाई दे रहा है।
इस औचक समझौते के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और समाज दो धड़ों में बंटता नजर आ रहा है। जहां कुछ स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता इस गंभीर मामले (दहेज हत्या के आरोप) में समझौते की तीखी आलोचना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोगों का मानना है कि मां को खो चुके मासूम बच्चों के बेहतर भविष्य और उनकी सही परवरिश को ध्यान में रखते हुए यह फैसला व्यावहारिक और सही है।

