ग्रेटर नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़ : ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी को अब दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल के विकल्प के रूप में एक विशाल और आधुनिक रेलवे टर्मिनल के तौर पर विकसित किया जाएगा। रेलवे मंत्रालय के नए प्रस्ताव के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने परियोजना के लिए अतिरिक्त जमीन के अधिग्रहण की तैयारी तेज कर दी है। पहले जहाँ इस प्रोजेक्ट के लिए मात्र 39 एकड़ जमीन की जरूरत थी, वहीं अब इसमें 99 एकड़ का इजाफा किया गया है, जिससे कुल जरूरत बढ़कर 138 एकड़ हो गई है।
नोएडा एयरपोर्ट और यमुना सिटी से होगा सीधा जुड़ाव
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने की वजह से आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में यात्रियों का दबाव अत्यधिक बढ़ने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए बोड़ाकी को एक बड़े ट्रांजिट हब के रूप में तैयार किया जा रहा है। इस टर्मिनल के बनने से गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लाखों यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए दिल्ली या आनंद विहार नहीं भागना पड़ेगा। इसे जेवर एयरपोर्ट और यमुना सिटी से भी सीधे कनेक्ट करने की योजना है।
7 गांवों के 1000 से अधिक किसान होंगे प्रभावित
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने बताया कि संशोधित योजना के तहत कुल 138 एकड़ जमीन की जरूरत है। इसके अलावा प्रभावित किसानों को जमीन के बदले जमीन (भूखंड) देने के लिए करीब 250 एकड़ अतिरिक्त जमीन खरीदी जाएगी। प्राधिकरण जल्द ही मुआवजे की नई दरें तय कर खरीद की प्रक्रिया शुरू करेगा। जिन सात गांवों में रेल संशोधन अधिनियम 2008 की धारा 20A के तहत जमीन ली जाएगी, उनके नाम हैं:
* चमरावली
🔸 बोड़ाकी
🔸 दादरी
🔸 तिलपता करनवास
🔸 पाली
🔸पल्ला
🔸 चमरावली रामगढ़
इस अधिग्रहण से करीब 1000 से अधिक किसान प्रभावित होंगे। प्रभावित किसानों को विकसित सेक्टरों में 6 प्रतिशत के विकसित भूखंड दिए जाएंगे।
एक ही छत के नीचे मिलेगी रेल, बस और मेट्रो की सुविधा
बोड़ाकी केवल एक रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि दिल्ली के आनंद विहार की तरह एक इंटीग्रेटेड ‘मल्टीमॉडल हब’ होगा:
🔸रेलवे: यहाँ 12 से 13 प्लेटफॉर्म और लगभग 63 यार्ड लाइनें बनाई जाएंगी, जिससे वंदे भारत और सुपरफास्ट समेत 100 से अधिक ट्रेनें यहाँ रुक सकेंगी।
🔸 बस टर्मिनल: परिसर में ही एक बड़ा इंटरस्टेट बस टर्मिनल (ISBT) विकसित किया जाएगा।
🔸मेट्रो: एक्वा लाइन मेट्रो का विस्तार डिपो स्टेशन से बोड़ाकी तक किया जाएगा।
रेलवे चेयरमैन के सुझाव पर बदली पूरी योजना
दरअसल, पहले बोड़ाकी को केवल माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स हब) के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना था। लेकिन यूपी सरकार और रेलवे की उच्च स्तरीय बैठक में रेलवे चेयरमैन ने सुझाव दिया कि भविष्य में दिल्ली के स्टेशनों पर नई ट्रेनों के लिए जगह नहीं बचेगी। इसलिए बोड़ाकी को पैसेंजर टर्मिनल के तौर पर अपग्रेड किया जाना चाहिए। इसी के बाद मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब के फेज-2 के रूप में इस यात्री टर्मिनल का खाका खींचा गया है।

