नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़ : पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर की थाना सेक्टर-20 पुलिस और एसओजी (SOG) टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले एक बेहद शातिर अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस और SOG की टीम ने मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर जाल बिछाकर सेक्टर-17 से दो तस्करों को दबोचा है। ये शातिर अपराधी चेकिंग से बचने के लिए साड़ियों की तह और पैकिंग के बीच में गांजा छिपाकर तस्करी कर रहे थे।
पकड़े गए बदमाशों के कब्जे से पुलिस ने 37 किलो 696 ग्राम उच्च गुणवत्ता का गांजा और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही 39 साड़ियाँ बरामद की हैं। बरामद किए गए इस विशेष गांजे की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 20 से 25 लाख रुपये बताई जा रही है।
पश्चिम बंगाल से कूरियर के जरिए आता था पार्सल, ‘फेक एड्रेस’ का खेल
पुलिस की कड़ी पूछताछ में गिरोह के सरगना शुभम पाठक ने तस्करी के इस अनोखे और चालाकी भरे नेटवर्क का खुलासा किया। शुभम पिछले करीब 2-3 साल से इस काले धंधे में सक्रिय है। उसने बताया कि वह विभिन्न नामी कूरियर कंपनियों का इस्तेमाल कर पश्चिम बंगाल से साड़ियों के पार्सल मंगवाता था। जांच एजेंसियों और पुलिस की नजरों से बचने के लिए पार्सल पर हमेशा अधूरा या असत्यापित (Fake) पता लिखवाया जाता था। पार्सल जैसे ही दिल्ली-एनसीआर के नजदीकी कूरियर ऑफिस पहुंचता था, शुभम डिलीवरी बॉय के पहुंचने से पहले ही फोन के जरिए कूरियर कंपनी से संपर्क कर खुद ही रास्ते में या ऑफिस जाकर उसे रिसीव कर लेता था। साड़ियों की पैकिंग में गांजा होने की वजह से कूरियर कर्मियों को कभी कोई शक नहीं होता था।
केमिकल प्रोसेसिंग से तैयार होता था ‘सुपर नशा’, बाजार में भारी मांग
पकड़े गए तस्करों ने पूछताछ में एक और चौंकाने वाली बात बताई। बरामद किया गया गांजा कोई साधारण गांजा नहीं है, बल्कि यह बेहद घातक और प्रीमियम क्वालिटी का नशा है। इसे ओडिशा, आंध्र प्रदेश और कुछ अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में उगने वाली गांजे की विशेष पत्तियों को सुखाकर तैयार किया जाता है। इसके बाद इन पत्तियों को कई स्तरों पर प्रोसेस (प्रसंस्करण) किया जाता है और एक खास रासायनिक प्रक्रिया (Chemical Process) से गुजारा जाता है। इस केमिकल कोटिंग की वजह से इस गांजे की मादक क्षमता (नशा) सामान्य गांजे के मुकाबले कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है। इसी ‘सुपर नशा’ क्षमता के कारण दिल्ली-एनसीआर के रईस युवाओं और रेव पार्टियों में इसकी डिमांड बहुत ज्यादा है और इसके दाम भी आसमान छूते हैं।
पकड़े गए दोनों ही आरोपी अच्छे खासे पढ़े-लिखे (स्नातक/Graduate) हैं, जो शार्टकट से अमीर बनने के चक्कर में अपराध की दुनिया में उतर गए। फिलहाल दोनों दिल्ली में ठिकाना बनाकर रह रहे थे:
1. शुभम पाठक (सरगना – उम्र 26 वर्ष): पुत्र राजेश पाठक, निवासी- खिरई का पूर्वा, थाना इनायत नगर, अयोध्या। (वर्तमान पता: ईस्ट विनोद नगर, मयूर विहार फेस-2, दिल्ली)। शिक्षा: स्नातक।
2. शिवम दूबे (उम्र 24 वर्ष): पुत्र अरुण कुमार दूबे, निवासी- जवाहर दूबे का पूर्वा, थाना कुमारगंज, अयोध्या। (वर्तमान पता: ईस्ट विनोद नगर, मयूर विहार फेस-2, दिल्ली)। शिक्षा: स्नातक।
गिरोह का मास्टरमाइंड शुभम पाठक महज 26 साल की उम्र में शातिर अपराधी बन चुका है। उसके खिलाफ अकेले अयोध्या और नोएडा में हत्या के प्रयास (307), गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में 8 मुकदमे दर्ज हैं।

