सेंट्रल नोएडा, भारतीय टॉक न्यूज़ : गौतमबुद्धनगर में कानून व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त करने और जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए पुलिस कमिश्नरेट लगातार जमीनी स्तर पर समीक्षा कर रही है। इसी कड़ी में पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशानुसार और डीसीपी सेंट्रल नोएडा शैलेन्द्र कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में थाना बादलपुर पर एक महत्वपूर्ण पुलिस सम्मेलन (गोष्ठी) का आयोजन किया गया।
एडीसीपी सेंट्रल नोएडा श्री स्वतंत्र कुमार सिंह और एसीपी-2 जितेंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में पुलिसकर्मियों को कार्यप्रणाली सुधारने के लिए कई कड़े और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।


‘यक्ष ऐप’ से मजबूत होगी बीट पुलिसिंग और जनसंपर्क
बैठक के दौरान एडीसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर जमीनी स्तर पर पुलिसिंग को मजबूत किया जाए। उन्होंने पुलिसकर्मियों को ‘यक्ष ऐप’ (Yaksh App) में बीट पुलिसिंग से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण सूचनाओं को नियमित रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने कहा कि बीट पुलिसिंग में सहभागिता बढ़ाने से न सिर्फ अपराधों पर लगाम लगेगी, बल्कि आम जनता के साथ पुलिस का सीधा संपर्क और संवाद भी बेहतर होगा।
पेंडिंग केसों के लिए टाइमलाइन तय, लापरवाही पर नपेगे विवेचक
विवेचनाओं (Investigations) में होने वाली देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों ने सभी जांच अधिकारियों (विवेचकों) को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है। निर्देश दिए गए हैं कि:
🔸”सभी लंबित विवेचनाओं का हर हाल में 60 से 90 दिनों के भीतर गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी तरीके से निस्तारण (निपटारा) सुनिश्चित किया जाए।” तय समय सीमा के अंदर केसों का निपटारा न होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए बनेगी स्पेशल टीम
थाना क्षेत्र से लापता या गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों को लेकर भी पुलिस अब गंभीर है। सभी थाना प्रभारियों को आदेश दिए गए हैं कि दर्ज गुमशुदगी के मामलों में तुरंत विशेष टीमें (Special Teams) गठित की जाएं। इसके साथ ही गुमशुदा व्यक्तियों की जल्द से जल्द बरामदगी के लिए सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर समुचित प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं।
IGRS और जनसुनवाई में न हो देरी
गोष्ठी में मौजूद सभी पुलिसकर्मियों को हिदायत दी गई कि वे थानों में आने वाले फरियादियों की बात को गंभीरता से सुनें और नियमित रूप से जनसुनवाई का आयोजन करें। मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) और जनशिकायतों के माध्यम से मिलने वाले सभी मामलों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पुलिस की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि जनता का भरोसा पुलिस पर और मजबूत हो सके।

