गौतमबुद्धनगर, भारतीय टॉक न्यूज़ : त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को लेकर गौतमबुद्धनगर जिले में इन दिनों भारी अनिश्चितता और असमंजस का माहौल बना हुआ है। जिले में ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है, और अब जिला पंचायत चेयरमैन का कार्यकाल भी खत्म होने की कगार पर है। इसके बावजूद, उत्तर प्रदेश शासन की ओर से आगामी व्यवस्था (प्रशासक की तैनाती या कार्यकाल विस्तार) को लेकर अभी तक कोई गाइडलाइन या स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया है, जिससे संबंधित विभाग असमंजस में हैं।
12 जुलाई को खत्म हो रहा जिला पंचायत अध्यक्ष का कार्यकाल
जानकारी के मुताबिक, गौतमबुद्धनगर के जिला पंचायत चेयरमैन का कार्यकाल आगामी 12 जुलाई को पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर, जिले के ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल बीते 26 जून को ही खत्म हो चुका है। नियमतः कार्यकाल समाप्त होने से पहले या ठीक बाद शासन द्वारा कमान किसे सौंपी जाएगी, इसका आदेश आ जाना चाहिए था, लेकिन हाई कोर्ट के एक पुराने रुख के बाद स्थिति पेचीदा हो गई है।
हाई कोर्ट के निर्देश से बढ़ी पंचायती राज विभाग की दुविधा
दरअसल, इस पूरे मामले में पंचायती राज विभाग के सामने सबसे बड़ी दुविधा हाई कोर्ट का वह कानूनी परामर्श और निर्देश है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित पद पर तय समय-सीमा के बाद कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
इस विधिक सलाह के बाद विभाग जिला पंचायत अध्यक्ष और ग्राम प्रधानों के पदों को लेकर किसी भी तरह का जोखिम या एकतरफा फैसला नहीं ले पा रहा है।
फिलहाल ‘यथास्थिति’ बरकरार, विकास कार्य हो सकते हैं प्रभावित
जब तक शासन की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक जिले की पंचायतों में ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनी हुई है। हालांकि, ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल खत्म होने और जिला पंचायत अध्यक्ष का समय पूरा होने की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों की स्वीकृतियों और बजट आवंटन पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पंचायती राज विभाग के सूत्रों का कहना है कि 12 जुलाई से पहले शासन स्तर पर एक हाई-लेवल मीटिंग होनी है, जिसके बाद ही गौतमबुद्धनगर सहित प्रदेश के अन्य प्रभावित जिलों के लिए आधिकारिक आदेश जारी किया जाएगा।

