ग्रेटर नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़ : ग्रेटर नोएडा से एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहाँ एक मां अपने 14 वर्षीय दिव्यांग बेटे को न्याय दिलाने के लिए कोर्ट की दहलीज तक पहुँच गई है। पीड़िता संगीता ने अपने पति और ससुराल वालों पर न केवल घरेलू हिंसा, बल्कि उनके दिव्यांग बेटे को भूखा रखने और उन्हें घर में ही ‘कैद’ करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला अब प्रशासन के संज्ञान में है और पीड़िता ने तत्काल राहत की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
संगीता की शादी वर्ष 2007 में लखनवानी गांव निवासी युवक से हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष का व्यवहार उनके प्रति अमानवीय रहा। 2012 में उनके पुत्र चिराग का जन्म हुआ, जो उचित देखभाल न मिलने के कारण कुपोषण का शिकार हुआ और धीरे-धीरे दिव्यांग हो गया।
पीड़िता का आरोप है कि 28 मार्च 2026 को जब वह अपने बच्चे को अस्पताल से घर लेकर लौटी, तो पति और ससुराल वालों ने घर का दरवाजा तक नहीं खोला। स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें घर में प्रवेश मिल पाया। संगीता का कहना है कि घर में रहने की इजाजत मिलने के बावजूद उन्हें और उनके बेटे को खाना-पानी तक नहीं दिया जा रहा है।
क्रूरता की हद देखिए कि मां-बेटे को घर में ही कैद कर रखा गया है। कमरे के बाहर सुरक्षा के नाम पर गार्ड और बाउंसर तैनात किए गए हैं, ताकि संगीता और उनका दिव्यांग बेटा किसी से मदद न मांग सकें। फिलहाल, उनकी जीविका पूरी तरह से उनके नाना हरकिशन द्वारा भेजे जा रहे भोजन पर निर्भर है।
कानूनी लड़ाई और प्रशासन से उम्मीद
संगीता के अधिवक्ता गजेंद्र सिंह खारी ने बताया कि मामले में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई है। हालाँकि, पीड़िता की नाजुक स्थिति को देखते हुए तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। इसे लेकर ऑल इंडिया लॉ यूनियन के सचिव अधिवक्ता अरुण प्रताप सिंह ने बताया कि बुधवार को वे जिलाधिकारी से मिलकर पीड़िता और उनके दिव्यांग बेटे के लिए सुरक्षा और तत्काल राहत की मांग करेंगे।

