भारतीय टॉक न्यूज़ (विशेष रिपोर्ट) /नोएडा: दिल्ली से सटे नोएडा में हिंडन नदी के डूब क्षेत्र को नए सिरे से व्यवस्थित, सुरक्षित और विकसित करने का एक बड़ा खाका तैयार किया गया है। पर्यावरणविदों ने नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। करीब 29,315 करोड़ रुपये की इस महा-योजना में हिंडन के तटबंध को मजबूत करने, उसके ऊपर शानदार 6-लेन सड़क का निर्माण करने, वीयर-कम-फॉल बनाने और बाढ़ से प्रभावित लगभग 10,000 परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, नोएडा प्राधिकरण इस योजना को अकेले अपने स्तर पर लागू नहीं कर सकता, इसलिए इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए उत्तर प्रदेश शासन के समक्ष रखा जाएगा।

प्रस्तावित योजना में सबसे बड़ा खर्च जमीन अधिग्रहण पर होना तय हुआ है। डूब क्षेत्र की जमीन खरीदने के लिए करीब ₹15,000 करोड़ का प्रावधान रखा गया है, जबकि 2,413 हेक्टेयर जमीन के विकास पर लगभग ₹7,240 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, मिट्टी की भराई पर ₹380 करोड़, तटबंध के ऊपर 6-लेन सड़क बनाने पर ₹2,425 करोड़ और तटबंध पर पत्थर की पिचिंग के काम पर ₹120 करोड़ का खर्च अनुमानित है। नदी में वीयर-कम-फॉल के निर्माण के लिए ₹150 करोड़ का बजट रखा गया है। इस योजना का एक अहम हिस्सा प्रभावित परिवारों का पुनर्वास है, जिसके तहत 10,000 परिवारों के विस्थापन और पुनर्वास के लिए प्रति परिवार ₹40 लाख की दर से कुल ₹4,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
पूरे विकास कार्य को व्यवस्थित रूप से अंजाम देने के लिए परियोजना को तीन अलग-अलग चरणों में बांटा गया है। पहला चरण डीएससी रोड से एक्सप्रेसवे तक होगा, जिसकी कुल अनुमानित लागत ₹12,370 करोड़ है और इसमें 1,000 परिवारों के पुनर्वास पर ₹400 करोड़ खर्च होंगे। दूसरा चरण बिसरख रोड ब्रिज से डीएससी रोड तक विकसित किया जाएगा, जिसकी लागत ₹6,449 करोड़ तय की गई है। अंतिम और तीसरा चरण एनएच-24 से बिसरख रोड ब्रिज तक होगा, जो इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा हिस्सा है। ₹10,496 करोड़ की लागत वाले इस तीसरे चरण में बड़े पैमाने पर जमीन खरीद के साथ-साथ 5,000 परिवारों के पुनर्वास का काम किया जाएगा।
इस पूरी परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद हिंडन डूब क्षेत्र की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी। तटबंध के ऊपर 6-लेन सड़क बनने से नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बीच एक वैकल्पिक और सुगम ट्रैफिक कॉरिडोर तैयार होगा, जिससे शहर की मुख्य सड़कों पर वाहनों का दबाव काफी कम हो जाएगा। इसके साथ ही, विस्थापित होने वाले हजारों परिवारों को पक्का और सुरक्षित ठिकाना मिलने से डूब क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही अवैध बस्तियों और बाढ़ के खतरों की समस्या का भी स्थायी समाधान निकल सकेगा।

