Noida/भारतीय टॉक न्यूज़ : उत्तर प्रदेश के चर्चित बिसहड़ा (दादरी) के मोहम्मद अखलाक हत्याकांड में मंगलवार को सेशन कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से केस वापस लेने के लिए दी गई याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। सेशन कोर्ट ने इस अर्जी को न केवल ‘महत्वहीन’ बताया, बल्कि इसे ‘आधारहीन’ करार देते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले की कानूनी सुनवाई पहले की तरह जारी रहेगी।
सामाजिक सौहार्द की दलील नहीं आई काम
गौरतलब है कि अक्टूबर माह में राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अदालत में एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि क्षेत्र में शांति और सामाजिक सौहार्द (Social Harmony) को फिर से स्थापित करने के लिए इस मुकदमे को वापस लेना जरूरी है।
इस अर्जी पर 18 दिसंबर को फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC) में लंबी बहस हुई थी। सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि जनहित और आपसी भाईचारे को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ चल रहे इस केस को बंद कर देना चाहिए।
पीड़ित पक्ष का कड़ा विरोध: “यह सामान्य अपराध नहीं”
अखलाक के परिजनों ने सरकार के इस कदम का अदालत में पुरजोर विरोध किया। परिजनों की ओर से दाखिल की गई आपत्ति में कहा गया कि:
🔸 यह कोई सामान्य झगड़ा या आपराधिक मामला नहीं है।
🔸यह ‘मॉब लिंचिंग’ (भीड़ द्वारा हत्या) का एक जघन्य उदाहरण है।
🔸ऐसे मामलों में केस वापस लेने से समाज में गलत संदेश जाएगा और न्याय व्यवस्था पर से लोगों का भरोसा उठ सकता है।
कोर्ट की टिप्पणी: “केस वापसी का कोई औचित्य नहीं”
सेशन कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुनाया। न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की अर्जी को अस्वीकार करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता और इसकी प्रकृति को देखते हुए इसे वापस लेने का कोई ठोस कारण नहीं दिखता। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही विधिवत रूप से आगे बढ़ेगी।

