ग्रेटर नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़ : जनपद के जारचा थाना क्षेत्र के सलारपुर गांव में सात साल पहले हुए सनसनीखेज सलीमुद्दीन हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी पति-पत्नी को दोषी पाते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। इस अंधे कत्ल की गुत्थी किसी और ने नहीं, बल्कि आरोपियों के ही मासूम बेटे की गवाही ने सुलझाई थी।
कुल्हाड़ी और डंडों से की गई थी बेहरमी से हत्या
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 7 नवंबर 2018 की है। सलारपुर गांव स्थित एक ईंट भट्टे के पास बने कमरे में सलीमुद्दीन उर्फ सलीम का शव खून से लथपथ मिला था। भट्टे के मुनीम ने जब सुबह अली हसन के कमरे पर दस्तक दी, तो अंदर का नजारा देख दंग रह गया। कमरे में सलीमुद्दीन की लाश पड़ी थी और अली हसन का छोटा बेटा वहां मौजूद था।
मासूम बच्चे ने पुलिस और मुनीम को बताया कि उसके माता-पिता, अली हसन और गुलशन उर्फ हाजरा ने मिलकर उसके फूफा सलीमुद्दीन पर कुल्हाड़ी और डंडों से हमला किया और उनकी हत्या कर दी। बच्चे की इस गवाही ने मामले को पूरी तरह साफ कर दिया।
बचाव पक्ष की दलीलें खारिज, अदालत ने सुनाया कड़ा फैसला
सुनवाई के दौरान आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए तर्क दिया था कि भट्टा मालिक पर मजदूरी के पैसे बकाया थे, जिसके कारण उन्हें झूठा फंसाया गया है। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया क्योंकि बचाव पक्ष इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां:
🔸 दोषी करार: पुलिस द्वारा बरामद की गई कुल्हाड़ी और प्रत्यक्षदर्शी (बच्चे) के बयान के आधार पर अली हसन और उसकी पत्नी गुलशन को हत्या का दोषी माना गया।
🔸 सजा का आधार: अदालत ने कहा कि यह एक गंभीर अपराध है, लेकिन इसे ‘दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, इसलिए दोषियों को फांसी के बजाय उम्रकैद की सजा दी जाती है।
🔸 पुलिस की कार्रवाई: जारचा पुलिस ने घटना के कुछ समय बाद ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद कर लिए थे।

