प्रयागराज | भारतीय टॉक न्यूज़ : उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों को समय पर संपन्न कराने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया में बुधवार (25 मार्च) को सुनवाई टल गई। चुनाव की रणभेरी बजने से पहले ही कानूनी गलियारों में मची इस हलचल के बीच, अब अदालत अगले सप्ताह इस याचिका पर सुनवाई करेगी। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 243E के तहत पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी करने से जुड़ा है।
क्या है पूरा विवाद?
अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता इम्तियाज हुसैन द्वारा दाखिल की गई इस याचिका में दलील दी गई है कि उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों की पहली बैठक 27 मई 2021 को आयोजित की गई थी। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, पंचायतों का 5 साल का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नियमतः कार्यकाल खत्म होने से पहले ही नई पंचायतों का गठन हो जाना चाहिए, लेकिन निर्वाचन आयोग की तैयारियों में देरी से चुनाव समय पर न होने की आशंका बढ़ गई है।
हाईकोर्ट का कड़ा रुख: निर्वाचन आयोग से मांगा हलफनामा
इससे पहले हुई सुनवाई में जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) को कड़े निर्देश दिए थे। अदालत ने आयोग से पूछा था कि क्या वह 26 मई 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कर सकता है? साथ ही, कोर्ट ने आयोग को एक विशिष्ट हलफनामा दाखिल कर चुनाव का ‘समयबद्ध शेड्यूल’ (Time-bound Schedule) रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया था।
याचिका में यह भी मुद्दा उठाया गया है कि मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीखों में बार-बार बदलाव किया गया है। पहले जो सूची दिसंबर 2025 में आनी थी, उसे बढ़ाकर अब 15 अप्रैल 2026 तक कर दिया गया है। ऐसे में समय पर चुनाव कराना एक बड़ी चुनौती नजर आ रहा है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भी निर्देशित किया है कि मामले की अगली सुनवाई पर महाधिवक्ता (Advocate General) या अपर महाधिवक्ता उपस्थित रहकर अपना पक्ष रखें।

