नोएडा/दादरी | भारतीय टॉक न्यूज़ : जनपद गौतमबुद्धनगर के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का एक बेहद घिनौना और चौंकाने वाला चेहरा सामने आया है। नोएडा सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल और दादरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में चंद रुपयों की खातिर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने के उद्देश्य से फर्जी ‘मेडिकल लीगल रिपोर्ट’ (MLR) तैयार करने का एक बड़ा रैकेट चल रहा था। एक साहसी स्टिंग ऑपरेशन में स्वास्थ्य विभाग के एक्स-रे टेक्नीशियन द्वारा कुल 71 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।
स्वास्थ्य विभाग के इस काले खेल को बेनकाब करने के लिए एक शिकायतकर्ता ने स्वयं मोर्चा संभाला और योजनाबद्ध तरीके से स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया। आरोप है कि सबसे पहले सीएचसी दादरी में बिना किसी चोट के मेडिकल रिपोर्ट बनाने का सौदा 11 हजार रुपये में तय हुआ। इसके बाद, खेल को और बड़ा करते हुए मामले को जिला अस्पताल रेफर कराया गया। वहां एक्स-रे में पसली में ‘हेयरलाइन फ्रैक्चर’ दिखाने के नाम पर 30 हजार रुपये और कान में गंभीर चोट (ट्रामैटिक पर्पोरेशन) की झूठी रिपोर्ट तैयार करने के नाम पर अलग से 30 हजार रुपये ऐंठे गए। कुल मिलाकर 71 हजार रुपये की डील हुई। इस दौरान रुपयों के लेन-देन में एक डॉक्टर की संलिप्तता की बात भी सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
डीएम मेधा रूपम सख्त; आरोपी टेक्नीशियन बर्खास्त, 3 डॉक्टरों की कमेटी गठित
मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तैरने और इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी मेधा रूपम ने तत्काल कड़ा संज्ञान लिया है। जिला अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस डॉ. अजय राणा ने बताया कि वायरल वीडियो में आरोपी कर्मचारी की पहचान होने के बाद एक्स-रे टेक्नीशियन को तत्काल प्रभाव से रेडियोलॉजी विभाग से हटाते हुए अस्पताल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. नरेंद्र कुमार ने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है। इस समिति में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शुभ्र मित्तल, डॉ. पंकज त्रिपाठी और डॉ. आरपी को शामिल किया गया है।
दादरी CHC में वसूली का पुराना इतिहास, हर बार बच जाते थे आरोपी
दादरी सीएचसी में अवैध वसूली और भ्रष्टाचार की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले जनवरी 2026 में भी बिसरख निवासी डॉ. पवन कुमार चौधरी ने स्वास्थ्य केंद्र पर जांच के नाम पर 12 हजार रुपये की अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगाया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर बार शिकायतों के बाद केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी कर भ्रष्ट कर्मचारियों को बचा लिया जाता था, जिससे उनके हौसले बुलंद थे। हालांकि, इस बार पुख्ता वीडियो सबूत सामने आने से पूरा स्वास्थ्य महकमा बैकफुट पर है और संलिप्त डॉक्टरों व कर्मचारियों पर एफआईआर (FIR) की तलवार लटक रही है।

