ग्रेटर नोएडा: सपा प्रतिनिधिमंडल के आगमन से पहले पुलिस का ‘हंटर’; राजकुमार भाटी और विकास जतन प्रधान, मोहित नागर , प्रशांत भाटी समेत दर्जनों दिग्गज नेता घरों में नज़रबंद

ग्रेटर नोएडा में सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी, मोहित नागर और विकास जतन प्रधान समेत कई नेता नज़रबंद। मजदूर आंदोलन के बीच सपा प्रतिनिधिमंडल के दौरे से पहले पुलिस का सख्त पहरा।

Partap Singh Nagar
4 Min Read
ग्रेटर नोएडा: सपा प्रतिनिधिमंडल के आगमन से पहले पुलिस का 'हंटर'; राजकुमार भाटी और विकास जतन प्रधान, मोहित नागर , प्रशांत भाटी समेत दर्जनों दिग्गज नेता घरों में नज़रबंद

ग्रेटर नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़:  जनपद के औद्योगिक क्षेत्रों में पिछले दिनों हुई हिंसा और चल रहे मजदूर आंदोलन ने अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले लिया है। आज, शुक्रवार को समाजवादी पार्टी (सपा) का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल गौतमबुद्धनगर पहुंच रहा है। हालांकि, इस दौरे से पहले ही जिले में सियासी घमासान शुरू हो गया है। सपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस प्रशासन ने उनके कई जिला स्तरीय पदाधिकारियों को सुबह से ही घरों में नज़रबंद कर दिया है, ताकि वे प्रतिनिधिमंडल के साथ मजदूरों से न मिल सकें।

मजदूरों की बदहाली पर ‘सपा’ का हल्ला बोल

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर गठित यह 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल  आज उन क्षेत्रों का दौरा करने वाला है, जहाँ हाल ही में न्यूनतम वेतन और सुविधाओं की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन हुए थे। दल का उद्देश्य श्रमिकों और उनके परिजनों से मिलकर एक रिपोर्ट तैयार करना है, जिसे सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंपा जाएगा।

सपा का यह प्रतिनिधिमंडल मुख्य रूप से फेज-2 स्थित उन क्षेत्रों का दौरा करेगा जहां हाल ही में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन हिंसक हो गया था। पार्टी का दावा है कि मजदूर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे, लेकिन पुलिस की लाठीचार्ज और सख्ती ने स्थिति को बिगाड़ दिया। प्रतिनिधिमंडल उन श्रमिकों और उनके परिवारों से भी मुलाकात करेगा जो पुलिस कार्रवाई में घायल हुए हैं या जिन्हें गिरफ्तार किया गया है।

नज़रबंद किए गए राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने सोशल मीडिया और फोन के माध्यम से प्रशासन की इस कार्रवाई पर तीखा प्रहार किया है।सपा नेताओं का आरोप है कि यह नज़रबंदी केवल इसलिए की गई है ताकि प्रतिनिधिमंडल को ज़मीनी हकीकत और पुलिस द्वारा मजदूरों पर किए गए कथित अत्याचार की जानकारी न मिल सके।

प्रशासन का पक्ष: शांति व्यवस्था सर्वोपरि

वहीं, पुलिस प्रशासन का तर्क है कि ज़िले में स्थिति अभी संवेदनशील है और धारा 144 लागू है। किसी भी बड़े जमावड़े या राजनीतिक दौरे से शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका को देखते हुए एहतियातन यह कदम उठाए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी प्रकार की नई अशांति को बर्दाश्त नहीं करेंगे

दूसरी ओर, प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी,  विकास जतन प्रधान, छात्र सभा नेता मोहित नागर और प्रशांत भाटी समेत दर्जनों दिग्गज नेताओं को उनके घरों में ही नज़रबंद कर दिया है। इन नेताओं के आवास के बाहर तड़के से ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया, जिससे कोई भी नेता घर से बाहर न निकल सके। प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से पहले ही स्थानीय पुलिस ने एहतियातन कई सपा नेताओं के आवास के बाहर पहरा बैठा दिया है। सपा नेताओं का कहना है कि यह “लोकतंत्र की हत्या” है और उन्हें मजदूरों की आवाज उठाने से रोका जा रहा है।

सरकार का पक्ष: वेतन में 21% की अंतरिम वृद्धि

गौरतलब है कि 13 अप्रैल को हुई हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मजदूरों के न्यूनतम वेतन में 21 प्रतिशत तक की अंतरिम वृद्धि की घोषणा की है। साथ ही, भविष्य के वेतन निर्धारण के लिए एक ‘वेज बोर्ड’ के गठन का भी निर्णय लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि अब स्थिति सामान्य है और औद्योगिक इकाइयों में काम सुचारू रूप से शुरू हो चुका है, लेकिन विपक्षी दल अभी भी मजदूरों के अधिकारों को लेकर सरकार को घेर रहे हैं।

 

Spread the love
Share This Article
Follow:
समाज, राजनीति और क्राइम पर पैनी नजर– सब कवर! सच्चाई उजागर, मिथक तोड़ता हूं |
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *