यमुना-ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे इंटरचेंज: जुलाई में खुलेंगे रास्ते; जेवर एयरपोर्ट की राह अब और आसान

यमुना-ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे इंटरचेंज जुलाई में खुलेगा। जेवर एयरपोर्ट तक पहुंच होगी आसान, 20 किमी दूरी कम होगी। जानें पूरी रिपोर्ट।

Partap Singh Nagar
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यमुना-ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे इंटरचेंज: जुलाई में खुलेंगे रास्ते; जेवर एयरपोर्ट की राह अब और आसान

ग्रेटर नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़ : ग्रेटर नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वाहन चालकों के लिए राहत की बड़ी खबर है। यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित इंटरचेंज अब अपने निर्माण के अंतिम चरण में है। अधिकारियों के मुताबिक, जून के अंत या जुलाई 2026 तक इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस इंटरचेंज के शुरू होते ही जेवर (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) तक का सफर न केवल आसान होगा, बल्कि करीब 20 किलोमीटर की दूरी भी कम हो जाएगी।

7 साल का इंतजार खत्म: 75% काम पूरा

वर्ष 2019 में परिकल्पित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने में कई चुनौतियां आईं। भूमि विवाद, किसानों का विरोध, कोविड-19 महामारी और लागत में बढ़ोतरी जैसे कारणों से यह प्रोजेक्ट लंबे समय तक अधर में लटका रहा। अब, करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य को तेजी से निपटाया जा रहा है, जिसमें ब्लैक लेयरिंग और अन्य तकनीकी काम शामिल हैं। जगनपुर अफजलपुर गांव (यमुना एक्सप्रेसवे का 10 किमी पॉइंट) के पास बन रहा यह इंटरचेंज अब आकार ले चुका है।

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की देखरेख में बन रहे इस इंटरचेंज के आंकड़े इसे एक विशाल परियोजना बनाते हैं:

🔸कुल लागत:* ₹432 करोड़।

🔸क्षेत्रफल: लगभग 48 हेक्टेयर।

🔸डिजाइन: इसमें कुल 8 लूप बनाए गए हैं, जिनकी संयुक्त लंबाई करीब 11 किलोमीटर है।

🔸ट्रैफिक मैनेजमेंट:4 लूप उत्तर और 4 लूप दक्षिण दिशा के ट्रैफिक को बिना किसी बाधा के दिशा देंगे।

क्या होगा बड़ा बदलाव?

1. जेवर एयरपोर्ट तक सीधी पहुंच: इस इंटरचेंज का सबसे बड़ा लाभ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को मिलेगा। अब उन्हें शहर के अंदरूनी रास्तों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।

 2. परी चौक से आजादी: वर्तमान में यात्रियों को सिरसा या परी चौक जैसे व्यस्त मार्गों से गुजरना पड़ता है, जहां अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। इंटरचेंज शुरू होने के बाद वाहन शहर में प्रवेश किए बिना सीधे एक एक्सप्रेसवे से दूसरे पर शिफ्ट हो सकेंगे।

3. ईंधन और समय की बचत: करीब 20 किलोमीटर की दूरी कम होने से यात्रियों के समय और ईंधन, दोनों की भारी बचत होगी।

इस इंटरचेंज से यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के विकसित हो रहे सेक्टरों को भी सीधा फायदा पहुंचेगा। जानकारों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से इस क्षेत्र में औद्योगिक निवेश और आवासीय गतिविधियों में और अधिक तेजी आएगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच आने-जाने वाले हजारों यात्रियों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगा।

 

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