ऑपरेशन अपराजेय: नोएडा पुलिस ने दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा के लिए खींची ‘लक्ष्मण रेखा’, 1645 बच्चों को मिला स्थायी संरक्षण

गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा और देखभाल के लिए 'ऑपरेशन अपराजेय' की शुरुआत की है। जानिए कैसे 1645 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का सहारा बनी नोएडा पुलिस।

Partap Singh Nagar
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ऑपरेशन अपराजेय: नोएडा पुलिस ने दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा के लिए खींची 'लक्ष्मण रेखा', 1645 बच्चों को मिला स्थायी संरक्षण

नोएडा/ भारतीय टॉक न्यूज़: जब समाज के सबसे कमजोर और संवेदनशील वर्ग—यानी विशेष आवश्यकता वाले (दिव्यांग) बच्चे—सुरक्षा और स्नेह की आस लगाते हैं, तब खाकी का एक ऐसा मानवीय चेहरा सामने आता है जो मिसाल बन जाता है। गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने समाज के प्रति अपने दायित्व को निभाते हुए एक अभूतपूर्व अभियान “ऑपरेशन अपराजेय” की शुरुआत की है।
पुलिस कमिश्नर श्रीमती लक्ष्मी सिंह के कुशल निर्देशन और अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. राजीव नारायण मिश्र के पर्यवेक्षण में शुरू हुआ यह अभियान महज एक कागजी योजना नहीं, बल्कि पुलिस की संवेदनशीलता का जीवंत प्रमाण है।

1645 बच्चों को चिन्हित कर बनाया गया ‘सुरक्षा कवच’

गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में अब तक ऐसे 1645 दिव्यांग बच्चों को चिन्हित किया गया है, जिन्हें विशेष देखभाल की जरूरत है। पुलिस कमिश्नरेट के तहत आने वाले सभी थानों में बने ‘मिशन शक्ति केंद्र’ अब इन बच्चों के लिए स्थायी संरक्षण कवच के रूप में काम करेंगे। पूर्ण गोपनीयता बनाए रखते हुए इन बच्चों का पूरा विवरण, माता-पिता का नाम, पता और उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं की जानकारी पुलिस डेटाबेस में दर्ज की जा रही है।

महिला बीट अधिकारी बनीं अभियान की ‘रीढ़’

इस पूरे अभियान को जमीन पर उतारने का जिम्मा महिला बीट अधिकारियों को सौंपा गया है।

पाक्षिक दौरा: महिला बीट अधिकारी हर 15 दिन में इन बच्चों, उनके अभिभावकों और केयर टेकर्स से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगी।
🔸कुशल-क्षेम और भरोसा:  इस मुलाकात का उद्देश्य सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि बच्चों का हालचाल जानना, उनकी जरूरतों को समझना और उनके मन में यह भरोसा जगाना है कि वे समाज में अकेले नहीं हैं।
🔸केयर टेकर्स का सत्यापन: बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो, इसके लिए उनके केयर टेकर्स का हर 15 दिन में चरित्र सत्यापन (Character Verification) भी किया जाएगा।

इमरजेंसी सपोर्ट और नेबरहुड सिक्योरिटी प्लान

किसी भी आपातकालीन स्थिति में बच्चों को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से लेकर बड़े अस्पतालों में शिफ्ट करने की त्वरित व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, बच्चों को Dial-112 और Child Helpline-1098 के इस्तेमाल के लिए जागरूक किया जा रहा है। समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अंतर-विभागीय समन्वय के जरिए एक Neighborhood Security Plan (नेबरहुड सिक्योरिटी प्लान) भी तैयार किया जा रहा है।
🔸विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी
🔸पुलिस कमिश्नरेट ने दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों की मदद के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर 8595902539 जारी किया है। किसी भी समस्या, शिकायत या सुझाव के लिए इस नंबर पर चौबीसों घंटे संपर्क किया जा सकता है, जिस पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

दिव्यांग बच्चों की मानसिक और शारीरिक स्थिति को संवेदनशीलता से समझने के लिए पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस सप्ताह मैक्स हॉस्पिटल नोएडा और अमिटी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों द्वारा महिला बीट अधिकारियों और अन्य पुलिस कर्मियों को व्यावहारिक और सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग दी जा रही है। इस पूरे अभियान की कमान नोडल अधिकारी के रूप में पुलिस उपायुक्त (महिला सुरक्षा) संभाल रही हैं।

‘ऑपरेशन अपराजेय’ यह साबित करता है कि पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली मशीन नहीं, बल्कि समाज की रक्षक और हमदर्द भी है। सीपी लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में नोएडा पुलिस ने यह दिखा दिया है कि जब कर्तव्य के साथ इंसानियत का मेल होता है, तो सबसे कमजोर वर्ग की सुरक्षा भी ‘अपराजेय’ हो जाती है। यह अभियान हर उस माता-पिता को संबल देता है, जिन्हें हमेशा अपने विशेष बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताती थी।

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