Prayagraj / भारतीय टॉक न्यूज़: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान को रामपुर के चर्चित डूंगरपुर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बुधवार को न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने आजम खान की जमानत अर्जी मंजूर कर ली ।इस मामले में रामपुर की एक एमपी-एमएलए अदालत ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ खान ने हाईकोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने इसी मामले में सह-अभियुक्त ठेकेदार बरकत अली को भी जमानत दे दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 2016 का है, जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी. उस दौरान रामपुर की डूंगरपुर बस्ती में बने कुछ मकानों को कथित तौर पर तोड़ दिया गया था ताकि वहां आसरा कॉलोनी (सरकारी आवास परियोजना) का निर्माण किया जा सके। इसके बाद, अगस्त 2019 में अबरार नामक एक व्यक्ति ने रामपुर के गंज थाने में आजम खान, तत्कालीन पुलिस अधिकारी आले हसन खान और ठेकेदार बरकत अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि दिसंबर 2016 में आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की, घर में तोड़फोड़ की और जान से मारने की धमकी देकर उनका मकान ध्वस्त कर दिया । इस प्रकरण में डूंगरपुर के निवासियों द्वारा लूट, चोरी और मारपीट जैसे आरोपों में कुल 12 मुकदमे दर्ज कराए गए थे ।
निचली अदालत ने सुनाई थी 10 साल की सजा
इसी मामले की सुनवाई करते हुए रामपुर की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने 30 मई, 2024 को आजम खान को दोषी करार देते हुए 10 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं, ठेकेदार बरकत अली को 7 साल की सजा मिली थी ।इस फैसले के खिलाफ आजम खान और बरकत अली ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की और सजा के खिलाफ जमानत की गुहार लगाई थी।
हाईकोर्ट में हुई सुनवाई और फैसला
आजम खान की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में 12 अगस्त, 2025 को सुनवाई पूरी हो गई थी, जिसके बाद जस्टिस समीर जैन की बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार, 10 सितंबर को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए आजम खान और बरकत अली, दोनों की जमानत अर्जियों को मंजूर कर लिया। यह जमानत उनकी आपराधिक अपील के लंबित रहने तक दी गई है. इस फैसले को आजम खान और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

