ग्रेटर नोएडा के 44 गांवों के किसानों का आर-पार का ऐलान: 10% आबादी प्लॉट के लिए 20 जुलाई से करेंगे अनशन, सत्ता पक्ष के नेताओं का विरोध करने की दी चेतावनी

ग्रेटर नोएडा के जैतपुर में 44 गांवों के वंचित किसानों ने बैठक कर 20 जुलाई से आमरण अनशन का ऐलान किया है। किसान 133वीं बोर्ड बैठक में पास हुए 10% प्लॉट के प्रस्ताव को शासन से मंजूरी दिलाने की मांग कर रहे हैं।

Partap Singh Nagar
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ग्रेटर नोएडा के 44 गांवों के किसानों का आर-पार का ऐलान: 10% आबादी प्लॉट के लिए 20 जुलाई से करेंगे अनशन, सत्ता पक्ष के नेताओं का विरोध करने की दी चेतावनी

ग्रेटर नोएडा / भारतीय टॉक न्यूज़ : ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के 44 गांवों के पीड़ित किसानों ने अपने वाजिब हक के लिए अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। रविवार को जैतपुर गांव स्थित झीडी के मंदिर में 4 प्रतिशत आबादी प्लॉट के लाभ से वंचित सैकड़ों किसानों ने एक महापंचायत का आयोजन किया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि सरकार और प्राधिकरण ने उनकी जायज मांगों को जल्द पूरा नहीं किया, तो आगामी 20 जुलाई 2026 से बड़े पैमाने पर अनशन शुरू किया जाएगा। इसके लिए किसान अब गांव-गांव जाकर जनसमर्थन जुटाएंगे।

133वीं बोर्ड बैठक के प्रस्ताव को शासन से पास कराने की मांग

किसान नेताओं ने बैठक में कहा कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 133वीं बोर्ड बैठक में किसानों को 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। लेकिन यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव अभी भी लखनऊ (शासन) में मंजूरी के लिए अटका हुआ है। किसानों की मांग है कि इस प्रस्ताव को कैबिनेट से तुरंत पास कराकर धरातल पर लागू किया जाए, ताकि सालों से भटक रहे प्रभावित किसानों को उनके हक के बचे हुए प्लॉट मिल सकें।

🔸पहले निकाला था मौन जुलूस: अपनी आवाज बुलंद कर रहे इन पीड़ित किसानों ने ठीक एक सप्ताह पहले ग्रेटर नोएडा में एक शांतिपूर्ण मौन जुलूस निकालकर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया था। लेकिन कोई ठोस आश्वासन न मिलने के कारण अब किसानों में भारी आक्रोश है।

किसानों ने साफ किया है कि वे इस समस्या के समाधान के लिए पूर्व में सत्ता पक्ष के समस्त जन-प्रतिनिधियों, विधायकों और सांसदों से कई बार मुलाकात कर चुके हैं।

किसान नेताओं ने आज एक बार फिर सत्ता पक्ष के सभी प्रतिनिधियों से पुरजोर निवेदन किया है कि वे किसानों के इस वाजिब हक को समझते हुए 133वीं बोर्ड बैठक से पास हुए प्रस्ताव को शासन से मंजूर कराकर लाएं। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी उन्हें सिर्फ कोरा आश्वासन मिला, तो वे गांवों में सत्ता पक्ष के नेताओं और प्रतिनिधियों का पुरजोर विरोध करने को विवश होंगे। किसानों का कहना है कि यह उनकी जमीन का वाजिब हक है, जिसके लिए वे पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

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