ग्रेटर नोएडा/भारतीय टॉक न्यूज़ : एक तरफ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार कांवड़ यात्रा 2026 को ऐतिहासिक और सुगम बनाने के लिए फूलों की बारिश कर रही है, वहीं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अफसर सरकार की साख पर बट्टा लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। दादरी-नोएडा रोड पर स्थित तिलपता गांव के प्राचीन शिव मंदिर के ठीक सामने मुख्य सड़क पिछले कई दिनों से ‘समंदर’ बनी हुई है। आलम यह है कि पवित्र सावन के महीने में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए आ रहे कांवड़ियों को गंदे और नाले के पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे न केवल उनकी आस्था को ठेस पहुंच रही है, बल्कि भारी नाराजगी भी है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के डिवीजन 3 के अधिकारी इस गंभीर समस्या को लेकर पूरी तरह बेपरवाह हैं। बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रेटर नोएडा फेलियर: कांवड़ियों की आस्था पर चोट!
तिलपता प्राचीन शिव मंदिर के सामने पिछले 15 दिन से सड़क ‘समंदर’ बनी हुई है। कांवड़ यात्रा शुरू हो चुकी है, लेकिन कांवड़िये गंदे/नाले के पानी से गुजरने को मजबूर हैं।
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— BT News |Bharatiya Talk| (@BharatiyaTalk) August 8, 2026
पिछले 15 दिन से गुहार, लेकिन प्रभात शंकर ने साधी चुप्पी
जलभराव की समस्या तिलपता में कोई नई नहीं है, लेकिन कांवड़ यात्रा के मद्देनजर इसकी संवेदनशीलता कई गुना बढ़ गई है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता अरुण खारी तिलपता ने ‘फेलियर साफ दिखाई पड़ रहा है’ के साथ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
अरुण खारी ने बताया, “कांवड़िया का आना-जाना चालू हो गया है, लेकिन पानी का निकासी नहीं हुई है। हम लोग ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के डिवीजन 3 में तैनात अफसर प्रभात शंकर से पिछले 15 दिन से रेगुलर बोल रहे हैं। उन्हें हर दिन समस्या बताई जाती है कि शिव मंदिर के सामने मुख्य सड़क डूबी हुई है, जल्द ही कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है, लेकिन उन्होंने एक न सुनी। उनकी कोई सुनवाई न करने की आदत के कारण आज कांवड़ियों को यह दिन देखना पड़ रहा है।”
प्राधिकरण का ‘शो-बाज़ी’: खाली ट्रैक्टर खड़े कर दिखाने की कोशिश
ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि प्राधिकरण समस्या को सुलझाने के बजाय जनता की आंखों में धूल झोंक रहा है। शिव मंदिर के पास सड़क पर पानी भरा हुआ है, और प्राधिकरण के अफसरों ने वहां ‘सिर्फ ट्रैक्टर’ खड़े कर रखे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह ट्रैक्टर खाली खड़े हैं और इनका इस्तेमाल पानी निकालने के लिए नहीं किया जा रहा है। यह केवल इसलिए खड़े किए गए हैं ताकि यदि कोई वरिष्ठ अधिकारी या मीडिया वहां आए, तो उन्हें लगे कि प्राधिकरण पानी निकालने की कोशिश कर रहा है। यह ‘शो-बाज़ी’ अब ग्रामीणों और कांवड़ियों के गुस्से को और भड़का रही है।
जनप्रतिनिधि मौन, आस्था पर चोट
यह मुख्य सड़क नोएडा को दादरी और आगे सिकंदराबाद से जोड़ती है। कांवड़ यात्रा के दौरान यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। इस जलभराव के कारण न केवल ग्रामीण परेशान हैं, बल्कि दूर-दूर से आ रहे कांवड़िये, जो नंगे पैर और पवित्र जल लेकर चलते हैं, उन्हें इस गंदे पानी से गुजरने पर भारी कष्ट हो रहा है।
अरुण खारी ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि, “जनप्रतिनिधि कोई ध्यान नहीं है।” वोट लेने के बाद स्थानीय विधायक या सांसद भी इस समस्या की सुध लेने नहीं आए हैं, जबकि वे अच्छी तरह जानते हैं कि यह शिव मंदिर प्राचीन है और आस्था का बड़ा केंद्र है।
Failure 2026: क्या ‘स्मार्ट विलेज’ का यही हाल है?
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तिलपता जैसे गांवों को ‘स्मार्ट विलेज’ (Smart Village) बनाने का दावा करता रहा है। लेकिन, ज़मीनी हकीकत यह है कि एक सामान्य बारिश के बाद यहां की सड़कें नालियों में तब्दील हो जाती हैं। कांवड़ यात्रा 2026 के मद्देनजर प्राधिकरण की यह नाकामी एक बड़ा ‘Failure 2026’ मानी जा रही है। अगर जल्द ही शिव मंदिर के सामने से पानी की निकासी नहीं हुई और सड़क की मरम्मत नहीं की गई, तो यह न केवल एक बड़ा हादसा करा सकती है, बल्कि प्रशासन के खिलाफ एक बड़े जन-आंदोलन का कारण भी बन सकती है।

