ग्रेटर नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़ : ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के स्थानीय और पीड़ित किसानों की वर्षों पुरानी मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सोमवार, 8 जून 2026 को क्षेत्र के 44 गांवों के सैकड़ों पीड़ित किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण (Greater Noida Authority) कार्यालय पर धावा बोला और एक विशाल लेकिन बेहद अनुशासित व शांतिपूर्ण ‘मौन जुलूस’ निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने इस प्रदर्शन के जरिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनके हक पर जल्द फैसला नहीं हुआ, तो यह मौन आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन का रूप ले लेगा।
किसान प्रतिनिधियों ने साफ तौर पर कहा कि वे केवल उत्तर प्रदेश सरकार और उच्च न्यायालय के पुराने आदेशों तथा प्राधिकरण के खुद के बोर्ड प्रस्तावों को जमीन पर लागू करने की मांग कर रहे हैं, जिसके लिए वे सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
क्या है पूरा विवाद: 6% दे दिया, लेकिन बाकी 4% पर कुंडली मारकर बैठा प्राधिकरण
धरनास्थल पर मौजूद किसान नेताओं और प्रतिनिधियों ने पूरे मामले की कड़ियों को खोलते हुए बताया कि माननीय उच्च न्यायालय (इलाहाबाद हाई कोर्ट) द्वारा वर्ष 2011 में एक ऐतिहासिक आदेश पारित किया गया था। इस फैसले और बाद के विभिन्न न्यायिक व प्रशासनिक निर्णयों में स्पष्ट प्रावधान था कि जिन किसानों की जमीनें अधिग्रहित की गई हैं, उन्हें 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा (प्रतिकर) और 10 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड दिए जाएंगे।
किसानों का आरोप है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने चालाकी दिखाते हुए अधिकांश पात्र किसानों को केवल 6 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड ही आवंटित किए, जबकि नियमानुसार मिलने वाले शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड के मामले को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। तब से लेकर आज तक किसान अपने इसी 4% हक के लिए प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं।
किसानों ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण की 133वीं बोर्ड बैठक (जो 26 दिसंबर 2023 को हुई थी) में पात्र किसानों को पूरा 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिए जाने का बकायदा एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इस प्रस्ताव को अंतिम प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के लिए उत्तर प्रदेश शासन (लखनऊ) भेजा गया था। लेकिन विडंबना यह है कि ढाई साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी शासन स्तर से इस पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है, जिससे 44 गांवों के हजारों किसान परिवारों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लगाई गुहार, दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारी किसानों और 44 गांवों के प्रतिनिधियों ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे के तहत बेहद शांतिपूर्ण और मौन रहकर अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश (योगी आदित्यनाथ), औद्योगिक विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के आला अफसरों से पुरजोर मांग की है कि किसानों के साथ किए गए वादों और खुद प्राधिकरण के बोर्ड प्रस्तावों को बिना किसी और देरी के तत्काल लागू किया जाए।
किसानों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि शासन और प्रशासन ने उनके इस शांतिपूर्ण ‘मौन जुलूस’ को कमजोरी समझा और शेष 4% विकसित आबादी भूखंडों के आवंटन पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और व्यापक, उग्र व निर्णायक रूप दिया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।

