न्यू नोएडा की जमीन का बनेगा डिजिटल नक्शा: नोएडा प्राधिकरण ने विभिन्न विभागों से मांगे GIS आधारित आंकड़े

न्यू नोएडा (DNGIR) के मास्टर प्लान को लेकर नोएडा प्राधिकरण ने तेज की तैयारियां। शहर का सटीक नक्शा तैयार करने के लिए बुलंदशहर प्राधिकरण और जिला प्रशासन से मांगा जीआईएस (GIS) आधारित डेटा।

Partap Singh Nagar
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न्यू नोएडा की जमीन का बनेगा डिजिटल नक्शा: नोएडा प्राधिकरण ने विभिन्न विभागों से मांगे GIS आधारित आंकड़े

नोएडा/ भारतीय टॉक न्यूज़ : दादरी से खुर्जा के बीच बसने वाले महत्वाकांक्षी शहर ‘न्यू नोएडा’ (दादरी-नोएडा-गाजियाबाद इन्वेस्टमेंट रीजन – DNGIR) को धरातल पर उतारने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। नए शहर के सटीक और आधुनिक नियोजन (Planning) के लिए प्राधिकरण ने भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) आधारित आंकड़े जुटाना शुरू कर दिया है। इसके लिए बुलंदशहर विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों को पत्र लिखकर विस्तृत जीआईएस डेटा मांगा गया है।

क्यों जरूरी है जीआईएस (GIS) डेटा?

दरअसल, न्यू नोएडा का विकास बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर के करीब 80 गांवों की जमीन पर होना प्रस्तावित है। प्राधिकरण इस पूरे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का बारीकी से अध्ययन करना चाहता है। मांगे गए आंकड़ों में क्षेत्र की प्राकृतिक और मानव निर्मित आधारभूत संरचनाओं की पूरी जानकारी शामिल होगी, जैसे:

🔸 प्राकृतिक स्रोत:  नदियां, नहरें, तालाब और अन्य जल निकाय (Water Bodies)।

🔸 यातायात नेटवर्क:  मुख्य सड़कें, आंतरिक मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग (Highways) और एक्सप्रेसवे।

🔸 अन्य संरचनाएं:  सिंचाई के मौजूदा स्रोत और कनेक्टिविटी पॉइंट।

डिजिटल मैप तय करेगा कहां क्या बनेगा

इन आंकड़ों का आधुनिक सॉफ्टवेयर के जरिए गहन विश्लेषण (Analysis) किया जाएगा। इसके बाद न्यू नोएडा का एक विस्तृत और थ्री-डी (3D) जीआईएस मैप तैयार होगा। यह मैप शहर की प्लानिंग में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। इसी के आधार पर यह तय किया जाएगा कि:

🔸आवासीय (Residential) और औद्योगिक (Industrial) क्षेत्र कहाँ विकसित किए जाएं।

🔸संस्थानों और कमर्शियल हब के लिए कौन सी जमीन सबसे उपयुक्त होगी।

🔸भविष्य के सड़क नेटवर्क और ट्रैफिक मैनेजमेंट को कैसे बेहतर बनाया जाए।

🔸पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए स्थानीय जल निकायों का संरक्षण किस तरह किया जाए

भविष्य का हाई-टेक हब होगा न्यू नोएडा

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, जीआईएस तकनीक के इस्तेमाल से भविष्य में जलभराव, ट्रैफिक जाम और अनियोजित विकास जैसी समस्याओं से पहले ही निपटा जा सकेगा। डेटा मिलते ही मैपिंग का काम शुरू हो जाएगा, जिससे इस मेगा प्रोजेक्ट को रफ्तार मिलेगी। न्यू नोएडा को एक लॉजिस्टिक्स, हब, उद्योगों और आधुनिक रिहायश के मिश्रण के रूप में विकसित करने की योजना है।

 

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