नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़ : नोएडा के सेक्टर-150 में 16 जनवरी की उस काली रात को पानी से भरे खुले गड्ढे में कार गिरने से हुई इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में अब 100 दिन बाद एक बड़ा मोड़ आया है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्ट में पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) के स्तर पर गंभीर लापरवाही को युवराज मेहता की मौत का एक बड़ा कारण माना गया है।
एसआईटी रिपोर्ट: पीसीआर की विफलता उजागर
एसआईटी की गहन जांच में यह पाया गया कि घटना के समय सूचना मिलने के बाद भी पुलिस कंट्रोल रूम ने जिस तत्परता और जिम्मेदारी का प्रदर्शन करना चाहिए था, उसमें भारी चूक हुई। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यदि पीसीआर की ओर से सही समय पर कार्रवाई की जाती, तो शायद युवराज मेहता की जान बचाई जा सकती थी। इस “प्रोसिजरल लैप्स” (प्रक्रियात्मक चूक) ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट के आधार पर विभागीय उच्चाधिकारियों ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए कार्रवाई की है। निम्नलिखित अधिकारियों और कर्मियों को दोषी पाते हुए निलंबित कर दिया गया है:
🔸ऐशपाल सिंह (असिस्टेंट रेडियो ऑफिसर – ARO)
🔸देवेंद्र शर्मा (रिजर्व सब इंस्पेक्टर – RSI)
🔸एक अन्य संबंधित कर्मी
निलंबन के साथ-साथ इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
5 सदस्य एसआईटी ने इस घटना के बाबत करीब 700 लोगों से पूछताछ की. इनमें नोएडा पुलिस, प्राधिकरण, एनडीआरफ और फायर ब्रिगेड के तमाम अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे. 100 दिन चली जांच के बाद अब एसआईटी ने रिपोर्ट दी है. इसमें पुलिस कंट्रोल रूम की भूमिका संदिग्ध माना है. कहा है कि कंट्रोल रूम ने हादसे की सूचना को गंभीरता से नहीं लिया, इसकी वजह से रेस्क्यू दल समय रहते एक्टिव नहीं हो पाया. एसआईटी की रिपोर्ट पर पुलिस कमिश्नर ने तीनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है.
अभी भी सवालों के घेरे में ‘नोएडा अथॉरिटी’ और ‘ट्रैफिक विभाग’
पुलिसकर्मियों पर हुई इस कार्रवाई के बाद भी पीड़ित पक्ष और नोएडा के नागरिकों में असंतोष बरकरार है। मुख्य सवाल अब भी वही है: सड़क सुरक्षा का जिम्मा किसका था?
प्राधिकरण की भूमिका: शहर के बीचों-बीच, जहां निर्माण कार्य चल रहा था, वहां पानी से भरे इतने गहरे गड्ढे की बैरिकेडिंग क्यों नहीं थी?
ट्रैफिक मैनेजमेंट: क्या सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था?
इन सवालों पर नोएडा अथॉरिटी और ट्रैफिक विभाग की चुप्पी ने लोगों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है। पुलिस पर कार्रवाई तो हो गई, लेकिन सड़क सुरक्षा और निर्माण कार्यों में लापरवाही के लिए जवाबदेह कौन है, यह अभी भी एक बड़ी पहेली बनी हुई है।
युवराज मेहता के परिजनों का कहना है कि यह केवल पुलिस की चूक नहीं, बल्कि एक आपराधिक लापरवाही है। सिस्टम की इस विफलता ने एक होनहार इंजीनियर की जान ले ली। अब उन्हें उम्मीद है कि एसआईटी की रिपोर्ट के बाद पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई केवल एक शुरुआत होगी और असली जिम्मेदार, जिन्होंने गड्ढे को असुरक्षित छोड़ा था, उन पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।

